Thursday, 3 October 2019

धर्म और विज्ञान (एक दूसरे के पूरक नही है)

"धर्म और विज्ञान एक दूसरे के पूरक नही है!"

विज्ञान परिवर्तनशील है रोज आविष्कार हो रहे है! विज्ञान जमीन से आसमान तक रोज मेहनत कर रहा है ताकि मानव जीवन सुखमय बन सके! तर्क,आंकड़े, प्रयोग,विश्लेषण ,अवलोकन,तकनीकी से रिजल्ट तक पहुच रहा है। विज्ञान रोज चौबीसों घंटे कुछ न कुछ कर रहा है जबकि धर्म जड़ है सैकड़ो वर्ष पहले लिखे गए जब न विज्ञान था न इंटरनेट था! आज जड़ हो चुके धर्म और धर्मग्रंथो का कोई औचित्य नही, टोटली आउटडेटेड हो चुके है , धर्म रोज अंधविश्वास बढ़ा रहा है नवाचार को शामिल नही कर रहा, धर्म के कारण इंसान अन्धविश्वासी,तर्कहीन,परिवर्तनशील विज्ञान का विरोधी और धार्मिक कुण्ठित ,जातिवादी ,कट्टर साम्प्रदायिक मानशिक रोगी होते जा रहा है। उस साधनहीन जमाने मे लिखी गयी बात आज के दौर में कोई काम की नही है, जबकि परिवर्तन प्रकृति का नियम है ! चार्ल्स डार्विन ने कहा था जो प्रकृति में होने वाले परिवर्तन के थपेड़े सह जाएगा वो अपना अस्तित्व बनाये रखेगा ,उसे जीवित रहने के लिए अपने आपको समयानुकूल ढालना ही होगा वरना उसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा! धर्म और धर्मग्रंथ अपने मे कोई परिवर्तन नही चाहते हा अगर धर्म भी अपने आपको परिवर्तनशील कर ले तो परिवर्तन के साथ जीवित रहेंगे वरना इंटरनेट की इस दुनिया के रहते धर्म आने वाली सदी का ऊगता सूरज नही देख पाएगा, और अंधभक्त बरसाती कुकरमुत्ते की तरह साफ हो चुके होंगे।
✍️ राजेश बकोड़े