अब आरक्षण को समझने में बहुत मज़ा आने वाला है अब शायद लोगो के मन मे जो गलत फहमियां थी वह सामान्य वर्ग को मिलने वाले 10% आरक्षण के साथ ही समझ आने लगी है ! अब मज़ा यह आने वाला है कि लोग इसके प्रति सोचने को मजबूर होंगे ही कि किस आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए ? सामान्यतः भारत के संविधान का मूल उद्देश्य सभी वर्गों के हितों की रक्षा के साथ ही उन्हें समता मूलक समाज की ओर बढाना, जहाँ जाति, धर्म,लिंग,वर्ग,में विभेद न हो सबको समान अवसर मिले, सबको सम्मान और अमीरी गरीबी की गहरी खाई मिटकर सबका स्तर एकसमान हो ! अब लोग यह सोचने जरूर मजबूर होंगे कि हमारी जनसँख्या के अनुपात में क्या हमें उतना मिला जितने के हम हिस्सेदार थे? मतलब अगर हमारा समाज 3% है तो क्या 3% का लाभ सरकारी नोकरियो में, देश के संसाधनों में,या देश की आय में शामिल है ठीक ऐसे ही 14% और 52% जनसँख्या वालो के लिए लागू होता है, सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण मिलने के साथ अब समझ आएगा लोगो को की हम आरक्षण के लिए कोसते किसे थे और कोसना किसे चाहिए था, सरल शब्दो मे समझिए ST/SC/OBC/minority इन सबको मिलाकर कुल जनसंख्या होती है 85% और आरक्षण मिल रहा है ST को 7.5%, SC को 14% इनकी जनसँख्या भी क्रमशः इतनी ही है 7.5% और 14% , एवं OBC को मिलता है 27% परंतु इनकी जनसंख्या है 52% जबकि ये वर्ग अल्पसंख्यक और कुछेक पिछडो को मिलाकर 60%से भी ज्यादा जनसँख्या का प्रतिनिधित्व करते है ! मतलब यह कि ST/SC/OBC/Minority की कुल 85% जनसंख्या कुल आरक्षण ले रही है 49.5% ! मतलब भारत का बहुसंख्यक वर्ग इन तीनो को मिलाकर कुल जनसंख्या का 85% होता है तो आरक्षण और देश के संसाधनों पर देश की आय पर,देश की कुल सरकारी और प्राइवेट नोकरियो पर इनका 85% हक होना चाहिए लेकिन इन्हें मिल रहा केवल 49.5% ! तो सवाल अब जेहन में ये उठ रहा है कि बाकी 50.5% आरक्षण कौन खा रहा है तो इसका जबाब है 85% लोगो (ST/SC/OBC)को छोड़कर जो 15% बचते है वो! और ये 15% कौन है ? ये 15% जनसँख्या वो है जो ST / ST/ OBC नही है मतलब सामान्य वर्ग! सामान्य वर्ग की कुल जनसंख्या भारत मे 15% है ! अब बात करते है आरक्षण की तो देश की 85% जनता तो 49.5%आरक्षण ले रही है लेकिन बाकी का बचा 50.5% ये 15% जनसंख्या ले रही है ! अब सरकार सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण देना चाहती है तो सामान्य वर्ग को ज्यादा खुश होने की जरूरत नही है क्योंकि सामान्य वर्ग में जातिगत देखा जाए तो केवल 3% लोग ही सवर्ण है बाकी के 12% लोग क्षत्रिय,राजपूत जैन और कुछ तथाकथित अगड़ी जातियां है लेकिन इनके साथ मुसीबत यह आ गयी है कि केवल 3% सवर्णों ने उन 12% लोगो का हक भी मार रखा है, क्योंकि जो 12% जनसँख्या का हक है वो भी 3% लोग ही खा रहे है अब सर मुंडाते ही ओले तो तब पड़ गए जब सरकार सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण देने के लिए तैयार है ! जबकि विडंबना यह है कि इनकी कुल जनसंख्या 15% है तो आरक्षण भी 15% मिलना चाहिए लेकिन सरकार 10% का लॉलीपॉप देना चाहती है इसमें सवर्णों में भी जो बहुसंख्यक जातियां है उनका हक मारा जा रहा है इनको कुल मिलाकर 15% आरक्षण मिलना था! सामान्य वर्ग को 15% आरक्षण इनका अधिकार है ये इनको मिलना ही चाहिये और इस बात का समर्थन सभी बहुसंख्यक वर्ग मतलब सभी St/sc/obc को करना चाहिए! अब वर्तमान में स्थिति यह है कि इस 15% सामान्य वर्ग में केवल 3% जनसँख्या वाला वर्ग पूरा 50.5% आरक्षण का मज़े लेकर सबसे ज्यादा मलाई मार रहा है क्योंकि 85% जनसँख्या तो केवल 49.5% आरक्षण लेकर ही खुश है! वैसे इन 85% आबादी वाली जनसँख्या में अपने अधिकारों को लेकर सबसे ज्यादा सजग वर्ग ST और SC है क्योंकि इनकी जितनी जनसँख्या है क्रमश 7.5% और 14% तो इनको आरक्षण भी उतना ही मिल रहा है क्रमशः 7.5% और 14% सबसे बड़ी समस्या है OBC के साथ ये जनसँख्या में 52% होता है लेकिन इनको मिल रहा केवल 27% ! और इनको लगता है कि देश आरक्षण की वहज से बर्बाद हो रहा है इनको यह समझने की जरूरत है कि आज आरक्षण को भीख कहने वाला सामान्य वर्ग भी 10% मिलने वाले आरक्षण को अपना अधिकार कहता है लेकिन ये OBC जिसको देश के संसाधनों में 52% हिस्सदारी मिलना था के लिए लड़ना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य देखिए ये 3% सवर्णों के सबसे बड़े समर्थक है जबकि इनका हिस्सा और सामान्य वर्ग की कुछ जातियों का हिस्सा ये 3% वाला ही चट कर रहा है , उस 3% ने बड़ी चालाकी से इनको धर्म रक्षक बना दिया है इनको 10-10₹ के भगवा गमछा देकर धर्म की रक्षा में झोंक दिया है! ये धर्म रक्षा में इतना उलझा हुआ है कि इसे इस बात का पता ही नही है कि मेरी वर्तमान स्थिति क्या है देश के 52% संसाधन मुझे मिले क्या? क्या मेरा वर्ग देश की कुल सरकारी पदों पर 52% नोकरिया हासिल है? क्या मेरी संताने बेरोजगार नही हो रही है? क्या देश की शिक्षा में निजीकरण होने के कारण मेरी पीढियो को अच्छी शिक्षा मिल पाएगी? क्योंकि सरकारी शिक्षा के संस्थानों को खत्म किया जा रहा है और निजी शिक्षा के संस्थानों को बढ़ावा दिया जा रहा है,इनकी शिक्षा बहुत महंगी है मेरा वर्ग पहले से ही आरक्षण से विमुक्त है , संसाधनों से विमुक्त है,बेरोजगारी ढो रहा है, लेकिन हमें क्या करना है ! हमे क्यो सोचना की हमारा हक कौन खा रहा है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और कितना भयावय होगा? इस बात पर चिंतन करना होगा ST और SC को उनकी जनसँख्या के अनुपात में आरक्षण मिल रहा है केवल OBC को उसका वाजिब हिस्सा नही मिल पा रहा है इसके लिए ओबीसी को लड़ना होगा उसे समय रहते जागना होगा,और इनकी इस लड़ाई में सारे St और Sc को साथ देना चाहिए,लेकिन ओबीसी मानता है हमे क्या करना हमे तो बस एक ही नारा "मंदिर वही बनेगा" "गर्व से कहो हम हिन्दू है "
बोलो जय श्री राम !
✍ लेखक: राजेश बकोड़े
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